मलेशिया 26 अक्टूबर से कुआलालंपुर में 47वें आसियान शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा

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1 मलेशिया 26 अक्टूबर से कुआलालंपुर में 47वें आसियान शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा​


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मलेशिया 26 अक्टूबर से कुआलालंपुर में समावेशिता और स्थिरता विषय पर अन्य शिखर सम्मेलनों के साथ 47वें आसियान शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में सभी आसियान नेता शामिल होंगे। इस समारोह के दौरान, तिमोर-लेस्ते के आसियान में प्रवेश संबंधी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जाएँगे, जो 11वें आसियान सदस्य देश के रूप में इसके औपचारिक प्रवेश का प्रतीक होगा। इन शिखर सम्मेलनों में आसियान शिखर सम्मेलन, आसियान और सात संवाद भागीदारों, अर्थात् ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया गणराज्य, रूस और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच आसियान प्लस वन शिखर सम्मेलन शामिल हैं। इसमें आसियान प्लस थ्री शिखर सम्मेलन, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, आसियान-संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन और संवाद संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आसियान-न्यूजीलैंड स्मारक शिखर सम्मेलन भी शामिल हैं।

2 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैसलमेर में कमांडर सम्मेलन के दौरान डिजिटल और कल्याणकारी पहलों का उद्घाटन किया​


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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजस्थान के जैसलमेर में थलसेना कमांडर सम्मेलन के दौरान कई प्रमुख डिजिटल और कल्याणकारी पहलों का उद्घाटन किया। इनमें कोणार्क और फायर एंड फ्यूरी कोर के लिए एज डेटा सेंटर शामिल हैं। ये केंद्र तेज़, सुरक्षित और कम समय में डेटा प्रोसेसिंग को सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे कम समय में परिचालन संबंधी निर्णय लिए जा सकेंगे। रक्षा मंत्री ने आधुनिक उपकरण हेल्पलाइन पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह सेना को एआई सक्षम रखरखाव सहायता और वास्तविक समय में तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। इस अवसर पर, अरमान प्लेटफॉर्म के द्वारा एक हजार दो सौ से अधिक रेलगाडियों में रक्षा ड्यूटी कोटा की सीटों के प्रबंधन को डिजिटल बनाने के लिए सैनिक यात्री मित्र ऐप का भी अनावरण किया गया। इससे सैन्‍यकर्मियों की यात्रा में पारदर्शिता और सुविधा आएगी।

3 भारतीय मूल के सुनील अमृत ने द बर्निंग अर्थ के लिए ब्रिटिश अकादमी पुस्तक पुरस्कार जीता​


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प्रसिद्ध भारतीय मूल के इतिहासकार सुनील अमृत (Sunil Amrith) ने अपनी उत्कृष्ट पुस्तक The Burning Earth: An Environmental History of the Last 500 Years के लिए ब्रिटिश एकेडमी बुक प्राइज़ 2025 जीता है। यह पुरस्कार हर वर्ष एक ऐसी गैर-काल्पनिक (non-fiction) पुस्तक को दिया जाता है, जो वैश्विक इतिहास, संस्कृति और समाज की गहरी समझ प्रस्तुत करती है। पुरस्कार राशि £25,000 (लगभग ₹26 लाख) है। सुनील अमृत येल विश्वविद्यालय (Yale University) में इतिहास के प्रोफेसर हैं। उनका जन्म केन्या में हुआ, उनका पालन-पोषण सिंगापुर में हुआ, और उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (University of Cambridge, England) से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

4 ओडिशा सरकार ने चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ को देखते हुए तटीय जिलों में तैयारियां तेज की​


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ओडिशा सरकार ने बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान मोंथा की आशंका को देखते हुए राज्य के तटीय जिलों में तैयारियां तेज़ कर दी हैं। बालासोर जिले में सभी सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द की गई हैं, जबकि गंजम जिले के अधिकारियों को अगले आदेश तक अपने मुख्यालयों में रहने को कहा गया है। राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासनों, विशेषकर दक्षिणी और तटीय जिलों, आपदा मोचन बलों और स्थानीय निकायों से किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहने को कहा है।

5 एएनआरएफ ने आईसीएमआर और गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से महा मेडटेक मिशन शुरूआत की​


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अनुसंधान राष्ट्रीय रिसर्च प्रतिष्ठान (एएनआरएफ) ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और गेट्स फाउंडेशन के सहयोग “महा MedTech” नामक एक महत्वाकांक्षी पहल की घोषणा की। इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य भारत के चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार को गति देना, उच्च लागत वाले आयातों पर निर्भरता कम करना और किफायती एवं उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा प्रौद्योगिकियों तक समान पहुँच को बढ़ावा देना है। यह मिशन शैक्षणिक और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, अस्पतालों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई, मेडटेक उद्योग और विभिन्न संस्थाओं के बीच सहयोग सहित विभिन्न संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। प्रत्येक परियोजना के लिए ₹5-25 करोड़ (और असाधारण मामलों में ₹50 करोड़ तक) के माइलस्टोन-लिंक्ड फंडिंग के साथ, यह मिशन उन परियोजनाओं को सहायता प्रदान करेगा जो बाज़ार में प्रभावशाली मेडटेक निवारण में सहयोग करती हैं।

6 टीईसी ने दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और मानकीकरण गतिविधियों में संयुक्त अध्ययन और तकनीकी योगदान पर सहयोग के लिए आईआईटी-हैदराबाद के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए​


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दूरसंचार विभाग (डीओटी), भारत सरकार की तकनीकी शाखा, दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (टीईसी) ने उन्नत दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और वैश्विक मानकीकरण गतिविधियों में संयुक्त अध्ययन, अनुसंधान और तकनीकी योगदान पर सहयोग करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद (आईआईटी हैदराबाद) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत-विशिष्ट मानकों और परीक्षण ढांचे को विकसित करना, 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और गैर-स्थलीय नेटवर्क (एनटीएन) जैसी भविष्य की नेटवर्क प्रौद्योगिकियों का पता लगाना और आईटीयू-टी (अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ – दूरसंचार मानकीकरण क्षेत्र) अध्ययन समूहों में भारत की भागीदारी को बढ़ाना है। यह साझेदारी टीईसी के लिए अगली पीढ़ी के दूरसंचार और मानकीकरण गतिविधियों पर आईआईटी हैदराबाद के साथ मिलकर काम करने के लिए एक औपचारिक ढांचा तैयार करती है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

  • मोबाइल संचार प्रौद्योगिकियां: 4जी, 5जी, एनबी-आईओटी आदि के लिए नेटवर्क आर्किटेक्चर, सिग्नलिंग और प्रोटोकॉल पर अध्ययन और तकनीकी योगदान।
  • ओपन आरएएन: ओपन आरएएन और नेटवर्क डिसएग्रीगेशन में सहयोगात्मक अनुसंधान, खुले इंटरफेस और ऑर्केस्ट्रेशन पर ध्यान केंद्रित करना।
  • 6जी: 3जीपीपी और संबंधित वैश्विक मंचों में मानकीकरण गतिविधियों में योगदान के साथ 6जी के लिए वास्तुकला और सक्षम प्रौद्योगिकियों की खोज।
  • गैर-स्थलीय नेटवर्क (एनटीएन): एनटीएन, एचएपीएस पर अनुसंधान और मानकीकरण तथा एनटीएन के साथ स्थलीय नेटवर्क (टीएन) का एकीकरण।
  • विशिष्ट अवशोषण दर (एसएआर): एसएआर जोखिम, अनुपालन ढांचे और स्वास्थ्य प्रभाव अध्ययन पर संयुक्त कार्य।

7 कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि द्वारा निर्मित पहला एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘माहे’ भारतीय नौसेना में शामिल​


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कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), कोच्चि द्वारा निर्मित आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) में से पहला ‘माहे‘ 23 अक्टूबर, 2025 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। केंद्र शासित पुडुचेरी के ऐतिहासिक बंदरगाह के नाम पर रखा गया ‘माहे’ भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रतीक है। इस पोत का डिज़ाइन और निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से किया गया है , जो नौसेना पोत निर्माण में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। यह तटीय जल के अंदर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (लिमो), पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) के लिए सुसज्जित है और इसमें उन्नत बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता है। लगभग 78 मीटर की ऊंचाई और लगभग 1,100 टन विस्थापन के साथ, यह पोत टॉरपीडो, बहुक्रियाशील पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उन्नत रडार व सोनार से लैस होकर जल के अंदर युद्ध में भी अपनी क्षमता का लोहा मनवा सकता है।

8 नासा ने पृथ्वी के अस्थायी दूसरे चंद्रमा, 2025 PN7 की खोज की पुष्टि की​


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पृथ्वी को हाल ही में एक नया अंतरिक्ष साथी मिला है — 2025 PN7 नाम का एक छोटा क्षुद्रग्रह, जिसे नासा ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है। यह कोई असली “चांद” नहीं है, लेकिन यह सूर्य की परिक्रमा लगभग पृथ्वी जैसी कक्षा में करता है, जिससे ऐसा लगता है मानो यह हमारे ग्रह के साथ-साथ अंतरिक्ष में यात्रा कर रहा हो। यह क्षुद्रग्रह सीधे पृथ्वी की परिक्रमा नहीं करता, बल्कि सूर्य की परिक्रमा एक ऐसी कक्षा में करता है जो लगभग पृथ्वी की कक्षा से मेल खाती है। इस कारण यह पृथ्वी के “पास-पास चलता हुआ” प्रतीत होता है, हालांकि वास्तव में यह स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष में घूम रहा है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2025 PN7 पिछले लगभग 60 वर्षों से पृथ्वी की कक्षा के समीप चल रहा है और यह स्थिति सन् 2083 तक बनी रह सकती है, जिसके बाद यह धीरे-धीरे गहरे अंतरिक्ष की ओर निकल जाएगा। अपने सबसे नजदीकी बिंदु पर यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी से करीब 40 लाख किलोमीटर की दूरी पर आता है — यानी हमारे चांद से लगभग 10 गुना ज्यादा दूर। अपने सबसे दूर बिंदु पर यह लगभग 1.7 करोड़ किलोमीटर दूर चला जाता है। हवाई विश्वविद्यालय (University of Hawaii) के खगोलविदों ने 2025 में एक नियमित आकाश सर्वेक्षण के दौरान इसे पहली बार देखा। यह तारों की पृष्ठभूमि में धीरे-धीरे चलता हुआ एक धुंधला बिंदु था।कई सप्ताह तक अध्ययन करने के बाद, नासा ने इसकी कक्षा की पुष्टि की और इसे “क्वासी-मून” (Quasi-Moon) यानी अर्ध-उपग्रह के रूप में वर्गीकृत किया — जो अस्थायी रूप से पृथ्वी के साथ सूर्य की परिक्रमा साझा करता है।

9 बजरंग सेतु: भारत का पहला ग्लास सस्पेंशन ब्रिज 2025 तक ऋषिकेश की तस्वीर बदल देगा​


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भारत के प्रमुख आध्यात्मिक एवं पर्यटन स्थलों में से एक ऋषिकेश अब एक नई स्थापत्य (architectural) पहचान हासिल करने जा रहा है। गंगा नदी पर बन रहा आधुनिक सस्पेंशन ब्रिज “बजरंग सेतु” लगभग तैयार है और दिसंबर 2025 तक इसके खुलने की संभावना है। यह पुल उस ऐतिहासिक लक्ष्मण झूला का स्थान लेगा, जिसे सुरक्षा कारणों से 2019 में बंद कर दिया गया था। लक्ष्मण झूला, जो 1929 में बना था, ऋषिकेश की पहचान और श्रद्धालुओं व पर्यटकों का मुख्य आकर्षण था।

10 निरस्त्रीकरण सप्ताह 2025​


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हर वर्ष 24 से 30 अक्टूबर तक निरस्त्रीकरण सप्ताह (Disarmament Week) मनाया जाता है, जो संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की वर्षगांठ से शुरू होता है। इस सप्ताह का उद्देश्य वैश्विक शस्त्र नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के मुद्दों के प्रति जागरूकता फैलाना और शांति, सुरक्षा तथा सतत विकास में उनकी भूमिका को समझना है। निरस्त्रीकरण सप्ताह की शुरुआत 1978 में यूएन जनरल असेंबली के विशेष सत्र (Resolution S-10/2) में प्रस्तावित की गई थी। बाद में, 1995 में, जनरल असेंबली ने सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को इस सप्ताह में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया (Resolution 50/72 B)। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना (1945) के बाद से निरस्त्रीकरण और शस्त्र नियंत्रण शांति और सुरक्षा के लिए इसके केंद्रीय मिशन का हिस्सा रहे हैं। उद्देश्य सरल है, लेकिन प्रभावशाली: भय और हथियारों की दौड़ की जगह संवाद, सहयोग और विश्वास को बढ़ावा देना।

11 अभिनेता सतीश शाह का आज 74 वर्ष की आयु में निधन​


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जाने-माने अभिनेता सतीश शाह का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सतीश शाह का जन्म 25 जून, 1951 को तत्‍कालीन बॉम्बे में हुआ था। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक किया और इसके बाद भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान, पुणे में दाखिला लिया। चार दशकों से भी अधिक की अपनी अभिनय यात्रा में उन्होंने थिएटर, फ़िल्म और टेलीविज़न में काम किया। उन्होंने 1970 और 1980 के दशक के अंत में हिंदी सिनेमा में सहायक भूमिकाओं से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की। 1983 की फ़िल्म “जाने भी दो यारो” में अपने प्रतिष्ठित अभिनय से उन्होंने एक लोकप्रिय पहचान बनाई। उन्होंने शक्ति, हम आपके हैं कौन, हम साथ-साथ हैं, मैं हूं ना, कल हो ना हो, फना, ओम शांति ओम और अन्य फिल्मों में भी अभिनय किया। टेलीविजन पर, सराभाई वर्सेस सराभाई में इंद्रवदन साराभाई के रूप में श्री शाह की भूमिका को भारतीय टेलीविजन के सबसे प्रतिष्ठित हास्य अभिनय में से एक माना जाता है।

12 थाईलैंड की राजमाता सिरीकित का 93 वर्ष की आयु में निधन​


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थाईलैंड की प्रिय और सम्मानित राजशाही हस्ती, क्वीन मदर सिरीकित (Queen Mother Sirikit) का शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025 को 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रॉयल हाउसहोल्ड ब्यूरो (Royal Household Bureau) ने पुष्टि की कि उनका निधन बैंकॉक के एक अस्पताल में हुआ, जहाँ उन्हें 17 अक्टूबर से रक्त संक्रमण (blood infection) के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। निरंतर चिकित्सा देखभाल के बावजूद, उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। हालाँकि वे अपने पति राजा भूमिबोल की लोकप्रियता के कारण अक्सर छाया में रहीं, परंतु क्वीन सिरीकित ने अपने मानवीय और विकास कार्यों के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने ग्रामीण जीवन सुधारने, गरीबी घटाने और थाईलैंड की पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करने के लिए अनेक राजकीय परियोजनाएँ (royal projects) शुरू कीं। ग्रामीणों को रेशम बुनाई, आभूषण निर्माण, चित्रकला, सिरेमिक, और अन्य पारंपरिक कलाओं में प्रशिक्षण देकर आय सृजन के अवसर दिए। “ग्रीन क्वीन (Green Queen)” के नाम से प्रसिद्ध, उन्होंने Forest Loves Water और Little House in the Forest जैसी परियोजनाएँ शुरू कीं, जो वन और जल संरक्षण के महत्व को दर्शाती थीं। उन्होंने वन्यजीव प्रजनन केंद्र, खुले चिड़ियाघर, और कछुआ संरक्षण केंद्र स्थापित किए ताकि संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा की जा सके।
 
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